90 दिन में तैयार होने वाली सोयाबीन की इन किस्मो की खेती कर किसान भाई हो जायेगे मालामाल, प्रति हेक्टेयर होती है 35-40 क्विंटल की पैदावार

90 दिन में तैयार होने वाली सोयाबीन की इन किस्मो की खेती कर किसान भाई हो जायेगे मालामाल, प्रति हेक्टेयर होती है 35-40 क्विंटल की पैदावार। सोयाबीन एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल है जो भारत में तेल और प्रोटीन की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एक लाभदायक फसल भी है, जो किसानों को अच्छी आय प्रदान कर सकती है। आइये जाने सोयाबीन की खुश खास किस्मो के बारे में।

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देखे सोयाबीन की कुछ खास किस्मे

एनआरसी 152

यह किस्म कम पानी वाली परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देती है। यह 90-95 दिनों में पक जाती है और इसकी औसत उपज 35-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

जेएस 323

यह किस्म पीले मोज़ेक रोग के प्रतिरोधी है और 100-105 दिनों में पक जाती है। इसकी औसत उपज 30-35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

आरकेएस 8

यह किस्म ख़रपतवार नाशक रोधी है और 85-90 दिनों में पक जाती है। इसकी औसत उपज 28-32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

मैक 252

यह किस्म रतुआ ख़रपतवार और टिड्डी के प्रतिरोधी है और 95-100 दिनों में पक जाती है। इसकी औसत उपज 32-37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

पास 14

यह किस्म थ्रिप्स और सोयाबीन स्टेम बोरर के प्रतिरोधी है और 80-85 दिनों में पक जाती है। इसकी औसत उपज 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

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सोयाबीन की  नई किस्मों से लाभ

सोयाबीन की नई किस्में कई लाभ प्रदान करती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • उच्च उपज: नई किस्मों में पुराने किस्मों की तुलना में अधिक उपज देने की क्षमता होती है।
  • रोग और कीट प्रतिरोध: नई किस्में कई रोगों और कीटों के प्रतिरोधी होती हैं, जिससे फसल नुकसान कम होता है।
  • कम पानी की आवश्यकता: नई किस्मों को कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे पानी की बचत होती है।
  • बेहतर पोषण गुणवत्ता: नई किस्मों में प्रोटीन और तेल की मात्रा अधिक होती है।
  • सोयाबीन की खेती

सोयाबीन की खेती के लिए इन बातो का रखे ध्यान

  • भूमि की तैयारी: खेत की अच्छी तरह से जुताई और बारीक करके तैयार करें।
  • बुवाई का समय: सोयाबीन की बुवाई जून-जुलाई में मानसून की शुरुआत में करनी चाहिए।
  • बीज की दर: बीज की दर प्रति हेक्टेयर 80-100 किलोग्राम है।
  • खाद और उर्वरक: खेत में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालें। इसके अलावा, रासायनिक उर्वरकों का भी इस्तेमाल करें।
  • सिंचाई: सोयाबीन को नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • खरपतवार नियंत्रण: खेत में खरपतवारों को नियमित रूप से निकालते रहें।
  • रोग और कीट नियंत्रण: फसल को रोगों और कीटों से बचाने के लिए आवश्यक उपाय करें।
  • कटाई: सोयाबीन की फसल 90

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